रविवार, 22 फ़रवरी 2026

आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

 


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

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वरिष्ठ पत्रकार नीलेश जाट, सौरभ राठौर, पंचम कुशवाहा का हुआ सम्मान

नरसिंहपुर। देश के सबसे संघर्षशील एवं 44 वर्षों से पत्रकारों के हितों में सेवा संघर्ष करने वाले ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन (आइसना ) राष्ट्रीय स्तरीय पत्रकार संगठन के द्वारा विगत नो वर्षों से पत्रकार सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन सतत रूप से किया जा रहा है जिसमे वरिष्ठ पत्रकारों और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों का सम्मान किया गया ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

22 फरवरी 2026 में मां नर्मदा के तट सीढी घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में भोपाल एवं जबलपुर से पधारे वरिष्ठ पत्रकारों एवं आईसना संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय जी. डेविड, प्रदेश महासचिव पंडित विनोद मिश्रा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमर नौरिया, प्रदेश संगठन महामंत्री प्रशांत वैश्य, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रहलाद कौरव, प्रांतीय उप सचिव कुणाल सिंह कार्यक्रम के जिला संयोजक केशव स्थापक कार्यक्रम प्रभारी और जिला अध्यक्ष राजेश लोधी संगठन को लेकर और पत्रकारिता क्षेत्र को लेकर अपने-अपने विचार रखें उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता बहुत कठिन दौर से गुजर रही है धरातल की पत्रकारिता वही है जो हर छोटे बड़े मुद्दे जनता से जुड़े मुद्दे उठाएं घोटालों को जनता के सामने लाना, अपनी कलम से उसे उजागर करना यही असली पत्रकारिता है पर आज ऐसे पत्रकारों को सबसे ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है जो घोटालों की परत खोल रहे है।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान


इस सफल कार्यक्रम के लिए सभी ने संगठन के सदस्यों की एकता एकजुटता की भी प्रशंसा की और कहा कि आइसना संगठन लगातार पत्रकारों के हितों में कार्य कर रहा है, संगठन के सदस्यों की एकजुटता से ऐसे आयोजन सतत रूप से होना संभव हुआ है.


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार नीलेश जाट ,सौरव राठौर और गाडरवारा के वरिष्ठ पत्रकार पंचम कुशवाहा जी का नगद राशि और स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मान किया गया ।

वहीं गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए करने के लिए संघर्ष करने वाले अनुराग भार्गव जी का भी सम्मान किया इस मौकों पर सिख समाज से भी कुछ वरिष्ठ शामिल हुए जिसमें जनरल सिंह और लखवीर सिंह द्वारा भी अपने विचार रखे ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

श्री बुद्ध प्रकाश विश्वकर्मा जी को नशे के खिलाफ आवाज उठाने के लिए और सुरेश ठाकुर को समाज सेवा के लिए सम्मानित किया गया वही संगठन के सहयोग के लिए बरमान के युवा पत्रकार सुभाष और वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर मालवीय जी को सम्मानित किया गया ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष विनय जी. डेविड द्वारा सभी पत्रकार बंधुओ को प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया, जिसमें संपादक गौरव रैकवार, धर्मपाल रजक, शिल्पी जैन , सचिन जोशी, सुश्री मालती गुर्जर, अरुण शर्मा, दीपक अग्रवाल, रंजीत तोमर, डाक्टर बृजेश रजक, अंकित नेमा आशीष दुबे, लीलाधर लोधी यश वर्मा, दीपक मुदगल सहित अनेक पत्रकारों को सम्मान पत्र प्रदत्त किए गए ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

कार्यक्रम वरिष्ठ पत्रकार प्रदेश सह सचिव मंजीत सिंह छाबड़ा जी द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रम में सभी वरिष्ठ पत्रकारों के साथ समाज सेबी भी उपस्थित रहे, साथ ही उनका सम्मान-साल श्रीफल व सम्मान पत्र देकर किया गया।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

नर्मदा घाट में हुए इस आयोजन में जबलपुर जिले से पत्रकार पुष्पेंद्र सिंह परिहार, पत्रकार राज गुलाटी, शैलेन्द्र शेलू सहित अन्य लोग उपस्थित हुए।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान


मंच संचालन मंजीत छाबड़ा और आभार कार्यक्रम के संयोजक केशव स्थापक द्वारा किया गया ।

सोमवार, 22 सितंबर 2025

पत्रकारों के लिए बड़ी खबर : समूह स्वास्थ्य बीमा योजनाओं पर जीएसटी की दरें यथावत, देखें प्रीमियम स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम दर, ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 27 सितंबर 2025

 

पत्रकारों के लिए बड़ी खबर : समूह स्वास्थ्य बीमा योजनाओं पर जीएसटी की दरें यथावत, देखें प्रीमियम स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम दर, ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 27 सितंबर 2025

  • पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना 2025-2026
  • प्रदेश के पत्रकार, फाटाग्राफर एवं कमरामन का स्वास्थ्य एव दुघटना समूह बामा का सुरक्षा

पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना की अंतिम तिथि बढ़ा कर 27 सितम्बर की, गत वित्त वर्ष 2024 की भांति प्रीमियम देना होगा

संचार प्रतिनिधियों के लिये स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 27 सितंबर 2025 निर्धारित की गई है। सभी पत्रकार साथियों से आग्रह किया गया है कि निर्धारित समय तक आवेदन कर योजना का लाभ जरूर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसम्पर्क विभाग द्वारा संचालित संचार प्रतिनिधियों के लिए स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना में वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी पत्रकारों से गत वित्त वर्ष 2024-25 की तरह ही प्रीमियम लिया जायेगा।

व्यक्तिगत बीमा पर जीएसटी से छूट, समूह बीमा पर यथावत

केंद्र सरकार ने जीएसटी रिफॉर्म्स के तहत व्यक्तिगत जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी शून्य कर दिया है। वहीं समूह स्वास्थ्य बीमा योजनाओं पर जीएसटी की दरें यथावत हैं।

पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना के नियम

*स्वास्थ्य बीमा रुपये 4 लाख और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा रुपये 10 लाख का होगा। साथ ही स्वास्थ्य बीमा 2 लाख रुपये और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा 5 लाख रुपये का भी विकल्प होगा। पत्रकार 4 लाख अथवा 2 लाख रुपये का बीमा करवा सकते हैं। 21 से 70 वर्ष की उम्र के संचार प्रतिनिधि इसके पात्र होंगे। पूर्व से बीमित पत्रकार 70 वर्ष की उम्र के बाद भी योजना के पात्रता होंगे।

*बीमा एक साल के लिये किया जायेगा। 60 वर्षतक के संचार प्रतिनिधि की वार्षिक बीमा प्रीमियम का 75 प्रतिशत और 61 से 65 वर्ष की संचार प्रतिनिधियों की बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा।

*पति, पनि, बच्चों (अधिकतम 25 वर्ष के तीन अविवाहित) एवं माता- पिता को निर्धारित प्रीमियम देने पर, योजना में शामिल किया जा सकेगा।

*बीमा पॉलिसी में पहले से विद्यमान सभी बीमारियाँ शामिल होंगी।

*जनसंपर्क संचालनालय के अधिमान्य पत्रकारों के साथ ही संचार संस्थान का फार्म 16 एवं पी.पी.एफ. कटौत्री की स्लिप देने वाले पत्रकारों को भी अधिमान्यता श्रेणी में पात्रता होगी।

*मध्यप्रदेश के मूल निवासी नई दिल्ली में कार्यरत पत्रकारों को भी योजना में पात्रता होगी। बीमा के लिये किये गये आवेदन-पत्र के साथ संलग्न प्रपत्र गलत पाये जाने पर किसीभी स्तर पर बीमा समाप्त किया जा सकेगा।

*गैर अधिमान्य पत्रकारों के लिये 50 प्रतिशत प्रीमियम पत्रकार द्वारा और 50 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा दिया जायेगा।

*इस श्रेणी में दैनिक समाचार-पत्र के चार, साप्ताहिक पाक्षिक मासिक पत्र-पत्रिका और इलेक्ट्रॉनिक एवं जनसंपर्क संचालनालय डी.ए.व्ही.पी. में पंजीकृत वेब मीडिया के दो-दो प्रतिनिधियों को योजना में पात्रता होगी। इसमें निर्धारित संख्यानुसार प्रथम प्राप्त 4/2 आवेदनों पर ही विचार किया जायेगा। आर.एन. आई. में रजिस्टर्ड नियमित पत्र-पत्रिकाओं के प्रतिनिधि पात्र होंगे।

*65 वर्ष सेअधिक उम्र के संचार प्रतिनिधियों का पूरा बीमा प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा देय होगा।

*पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी के चिन्हित अस्पतालों में इलाज की कैशलेस व्यवस्था होगी जिसके लिये पत्रकारों को ई-कार्ड, ई-मेल के माध्यम से भेजा जायेगा । अस्पताल में इलाज के दौरान पत्रकारों को आधार कार्ड ले जाना जरूरी होगा।

*योजना का विवरण, प्रीमियम तालिका जनसंपर्क की वेबसाइट www.mpinfo.org में उपलब्ध है। प्रीमियम को NEFT कर यू.टी.आर. नंबर की जानकारी सहित अन्य पूरी जानकारी ऑनलाइन htttps://mdindiaonline.com/mpgovt/loginpage.aspx लिंक पर उपलब्ध फार्म में भरनी होगी। फार्म ऑफ लाइन नहीं लिये जायेंगे। अधिमान्यता प्राप्त और गैर-अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों के अलग अलग फार्म हैं। निर्धारित फार्म ही भरें।

*तालिका में पत्रकार पति-पत्नि एवं बच्चों का प्रीमियम जोड़कर दिया गया है। माता-पिता का प्रीमियम अलग से तालिकानुसार जोड़ना होगा।


पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना, प्रीमियम स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम दर

पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना, प्रीमियम स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम दर




पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना, प्रीमियम स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम दर

रविवार, 31 अगस्त 2025

आइसना पत्रकार संगठन ने पुलिस अधीक्षक को पत्रकार सुनील सेन पर हमला करने वालो के खिलाफ ज्ञापन सौंपा

  


आइसना पत्रकार संगठन ने पुलिस अधीक्षक को पत्रकार सुनील सेन पर हमला करने वालो के खिलाफ ज्ञापन सौंपा


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जबलपुर . पत्रकार सुनील सेन पर हुए हमले के विरोध में पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत ज्ञापन सौपा है संदिग्ध आरोपी की गिरफ्तारी न होने से नाराज पत्रकार संगठन "ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन" ( आइसना ) ने पुलिस अधीक्षक जबलपुर को ज्ञापन सौंपा ।

जबलपुर शहर के गढ़ा थाना क्षेत्र में रात एक कैमरामैन पत्रकार सुनील सेन पर जानलेवा हमला किया गया। हमलावरों ने रात लगभग 1 बजे पत्रकार को रास्ते में घेरकर खबर हटाने का दबाव बनाया और इनकार करने पर बेरहमी से पिटाई की। घायल पत्रकार को तत्काल स्थानीय लोगों की मदद से निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद से पत्रकार समुदाय में भारी आक्रोश है।

जानकारी के अनुसार पत्रकार सुनील सेन, मेडिकल क्षेत्र से एक न्यूज़ कवर कर अपने घर लौट रहे थे। तभी पिसनहारी की मड़िया के पास स्थित पेट्रोल पंप के समीप, नीले रंग की स्विफ्ट कार में सवार चार से पांच युवकों ने उनका रास्ता रोका। आरोपियों ने पत्रकार को घेर लिया और किसी खबर को लेकर नाराजगी जताते हुए गाली-गलौज करने लगे। जब पत्रकार ने उनकी बात मानने से इनकार किया तो आरोपियों ने मिलकर उनकी जबरदस्त पिटाई कर दी।

शोर सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। क्षेत्रीय लोगों की मदद से घायल पत्रकार को अस्पताल पहुंचाया गया और मामले की सूचना गढ़ा थाना पुलिस को दी गई। थाने के प्रभारी पुलिस अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और प्राथमिक जांच शुरू की।

सूत्रों के मुताबिक, हमले की वजह एक स्थानीय डॉक्टर से जुड़ी खबर को बताया जा रहा है, जिससे संबंधित लोग पत्रकार पर खबर हटाने का दबाव बना रहे थे। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।


पत्रकार संगठन "ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन"
 ( आइसना )

इस घटना के बाद पत्रकारिता जगत में रोष की लहर है। पत्रकार संगठन "ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन" ( आइसना ) ने प्रशासन से मामले में त्वरित गिरफ्तारी और पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। मांगो को लेकर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन ( आइसना ) के प्रदेश अध्यक्ष एवं टाइम्स ऑफ क्राइम न्यूज़ चैनल के संपादक विनय जी डेविड, ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन के संगठन महामंत्री एवं देवांश भारत समाचार पत्र के संपादक प्रशांत वैश्य, पत्रकार राहुल सक्सेना, पीवीसी न्यू संचालक कुणाल सिंह एवं संवाददाता राज गुलाटी, आयुष्मान के जबलपुर जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह परिहार, साधना न्यूज़ से संवाददाता पंकज विश्वकर्मा एवं पदाधिकारी आदि मौजूद रहे।


बुधवार, 1 मार्च 2023

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ

  

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 
नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 



नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना
का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 




नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न, समाचार पत्रों की झलकियाँ 




नर्मदा तट बरमान घाट पर हुआ आईसना संगठन का मिलन सम्मान समारोह

 


नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न


  • आज नर्मदा तट बरमान घाट पर हुआ आईसना संगठन का मिलन सम्मान समारोह
  • अपने सामाजिक क्षेत्र में लगातर कार्यरत व्यक्तियों का हुआ सम्मान,,
  • प्रदेश अध्यक्ष विनय डेविड जी की अध्यक्षता में कार्यक्रम संपन्न हुआ

नशामुक्ति अभियान चलाने वाले आदरणीय बुद्धिप्रकाश जी विश्वकर्मा, फुटपाथी व्यापारियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले आदरणीय अनिल गुप्ता जी, नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को हमेशा यथासम्मान देने वाले आदरणीय असित तिवारी जी, कई वर्षो से लगातर समस्त जिले में पत्रकारिता रूपी फोटोग्राफी करने वाले संजय राय जी, आदिवासी हितों पर काम करने वाले आदरणीय सुरेश ठाकुर जी,और दिव्यांग पत्रकार भाई धर्मेन्द्र लोधी को उनके सामाजिक क्षेत्र में लगातर किए जा रहे जनहितेशी कार्यों के लिए सम्मानित किया गया ।

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ कार्यक्रम के कवरेज के लिए सभी पत्रकार साथियों ने स्थान दिया, उसके लिए सभी का धन्यवाद आप सभी का स्नेह प्यार और आशीर्वाद बना रहे


नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न




नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न

नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न

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नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न


नरसिंहपुर में बरमान घाट पर ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन आइसना
का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न


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सोमवार, 27 फ़रवरी 2023

आयुक्त जनसंपर्क की नाक के नीचे माध्यम का सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी निकला आईटी हेड आत्माराम शर्मा

  



आयुक्त जनसंपर्क की नाक के नीचे माध्यम का सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी निकला आईटी हेड आत्माराम शर्मा


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  • *आत्‍माराम ने अपनी पत्नि के नाम मासिक पत्रिका तूर्यनाद को दिलवाया 35 लाख का विज्ञापन*
  • *मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी जरूरतमंद पत्रकारों का हिस्सा चट करने से नहीं चूके माध्‍यम के अधिकारी*

*विजया पाठक, भोपाल*

अंधेर नगरी चौपट राजा.... यह कहावत आपने जरूर सुनी होगी। इस कहावत को सही कर दिखाया है मध्यप्रदेश जनसंपर्क संचालनालय की अधीनस्थ संस्था मध्यप्रदेश माध्यम में काम करने वाले आईटी हेड आत्माराम शर्मा ने। भ्रष्टाचार, घूसखोरी और कमीशनखोरी में लिप्त आत्माराम की करतूतों की परतें खुलना शुरू हो गई हैं। वर्षों से माध्यम की एक ही शाखा में पदस्थ आत्माराम शर्मा किस तरह से फर्श से अर्श तक पहुंचे हैं इसके बारे में हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बतायेंगे। 

लेकिन उससे पहले आत्माराम शर्मा की करतूतों को जान लेना जरूरी है। दरअसल बीते दिनों सूचना के अधिकार के तहत जनसंपर्क विभाग से जानकारी चाही गई कि मासिक पत्रिका और बेवसाइटों को शासन द्वारा कितना विज्ञापन मिला है। जब जानकारी हाथ लगी तो उसमें विज्ञापन के एवज में संस्थाओं को दी जाने वाली राशि देख आंखें खुली की खुली रह गई। डेढ़ से दो लाख रूपये महीने तन्ख्वाह पाने वाले आत्माराम शर्मा को जनसंपर्क विभाग से मासिक पत्रिका तूर्यनाद के लिए ढाई लाख रूपये और बेवसाइट को 30 लाख रूपये से अधिक का विज्ञापन जारी हुआ है। 

आत्माराम शर्मा यह पत्रिका अपनी पत्नी के नाम से चलाते हैं और इसी नाम से उन्होंने बेवसाइट का संचालन भी किया। सूचना के अधिकार में विज्ञापन के एवज में जो राशि दिये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है उससे साफतौर पर यह मालूम चलता है कि आत्माराम शर्मा की यह हरकत माफी योग्य नहीं है। उन्होंने जरूरतमंद और गरीब पत्रकारों के हक का पैसा खाया है। उनके द्वारा किया गया यह ऐसा घिनौना कृत्य है जिसके लिए उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए। सूत्रों के अनुसार आत्माराम के इस खेल में जनसंपर्क और माध्यम के कई आला अधिकारी और बाबू भी शामिल हैं, जो मिलवाट कर जनसंपर्क विभाग का बट्टा बैठाने में लगे हुए हैं।

*करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार में लिप्त हैं आत्‍माराम*

एक डेलीवेज वर्कर के रूप में पहली बार माध्यम में काम करने आये आत्माराम शर्मा ने अपनी नियुक्ति के कुछ सालों में ही जो तरक्की की है उससे साफ यह जान पड़ता है कि आत्माराम शर्मा किस हद तक भ्रष्टाचारी हैं। उनकी कार्यशैली शुरू से ही संदेहात्मक रही है। शर्मा ने पैसों के प्रभाव में पहले तो गलत ढंग से प्रमोशन लिये और जब उन्हें प्रमोशन मिल गये तो वे इसका गलत फायदा उठाते हुए माध्यम में होने वाली खरीदी में भ्रष्टाचार को अंजाम देने लगे। बीते दिनों माध्यम में प्रशासन के निर्देशानुसार इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की बड़ी खरीदी हुई है। यह खरीदी संदेह के घेरे में है। बताया जाता है कि आत्माराम ने माध्यम के प्रमुख पद पर बैठे अफसर को अपना झांसे में लेते हुए बाजार से कई गुना महंगी कीमतों पर खरीदी की है और इससे मिलने वाला भ्रष्टाचार का पैसा उन तक पहुंचाया है। अगर इस खरीदी की सही ढंग से जांच हो जाये तो माध्यम के अंदर ही एक बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो जायेगा।

*क्‍या शर्मा के भ्रष्टाचार की जानकारी के अभाव में हैं आयुक्त?*

जनसंपर्क आयुक्त राघवेन्द्र कुमार सिंह खुद एक सुलझे हुए व्यक्ति हैं। उनका उद्देश्य समय-सीमा पर बेहतर कार्य करना है। लेकिन माध्यम के आला अफसरों ने उनकी नाक के नीचे जिस तरह का भ्रष्टाचार फैला रखा है, क्‍या उससे आयुक्त पूरी तरह से अनभिज्ञ है? आत्माराम शर्मा द्वारा किया गया भ्रष्टाचार उसी का एक उदाहरण है। इसका बड़ा कारण है कि जनसंपर्क आयुक्त राघवेन्द्र कुमार सिंह अधिकत्तर समय जनसंपर्क संचालनालय में बैठते हैं। वे माध्यम कम ही आते जाते हैं। माध्यम के तथाकथित वरिष्ठ अफसर जो जानकारी उन्हें देते हैं उसे वे सच मानकर स्वीकार कर लेते हैं। जबकि आयुक्त को इसकी तह में जाना चाहिए जिससे उन्हें वहां के अन्य भ्रष्टाचारों की जानकारी भी मिलेगी। किसी एक अफसर के कह देने मात्र से सभी चीजों को सही मान लेना एक वरिष्ठ अफसर के लिए समझदारी भरा कदम नहीं है।

*निरतंर पढ़ते रहिए आत्माराम शर्मा और माध्‍यम में हो रहे भ्रष्टाचार की परतें...*

शनिवार, 23 अक्टूबर 2021

इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने फर्जी पत्रकार के विरुद्ध की कारवाई, फर्जी पत्रकार देवेंद्र मराठा 6 महीने के लिए रासुका की हुई कार्यवाही

  

इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने फर्जी पत्रकार के विरुद्ध की कारवाई, फर्जी पत्रकार देवेंद्र मराठा 6 महीने के लिए रासुका की हुई कार्यवाही


 ANI NEWS INDIA

🔷 फर्जी वसूलीबाज कथित पत्रकार जबलपुर के बादल पटेल, नीमच के नरेंद्र गहलोत, अविनाश जाजपुर के विरुद्ध रासुका की कार्रवाई करने की उठने लगी मांग
🔷 अड़ीबाजो की पत्रकार गैंग जबलपुर के बादल पटेल फर्जी आइसना के प्रदेश सेक्रेटरी ( करीब 8 केस दर्ज क्रिमिनल ), नरेंद्र गहलोत फर्जी आइसना के प्रदेश कोषाध्यक्ष ( करीब 4 केस दर्ज क्रिमिनल ), अविनाश जाजपुर फर्जी आइसना के इंदौर संभाग के महासचिव, 
🔷 फर्जी आइसना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं अवधेश भार्गव ( करीब 10 केस दर्ज क्रिमिनल 100 से ज्यादा क्रिमिनल कांड, कई अपराधिक प्रकरण में माननीय न्यायालय, हाई कोर्ट में विचाराधीन एवं जांच एजेंसियों में विवेचना में )

इंदौर। कलेक्टर मनीष सिंह ने शासकीय अधिकारियों को भी फर्जी पत्रकारों से दूरी बनाए रखने के दिए निर्देश, कलेक्टर मनीष सिंह ने जिलेवासियों से अपील की है की वसूली के इरादे से आने वाले फर्जी पत्रकारों को करें पुलिस के सुपूर्द

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20 अक्तूबर 2021। इंदौर में जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग का गौरखधंधा चलाने वाले गिरोह पर प्रहार शुरू कर दिया गया है। कलेक्टर मनीष सिंह ने जबरन वसूली की कई शिकायतों पर फर्जी पत्रकार देवेंद्र मराठा के खिलाफ कड़ी कारवाई करते हुए उसे रासुका के तहत 6 महीने के लिए निरुद्ध कर दिया है।

देवेंद्र मराठा को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3 की उपधारा 2 के तहत तथा गृह विभाग के आदेश दिनांक 17/09/2021 के तहत तथा जिला दंडाधिकारी को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 6 माह के लिए सेंट्रल जेल इंदौर में निरुद्ध करने के लिए आदेश जारी कर दिए गए है।

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देवेंद्र पिता रमेशचन्द्र मराठा निवासी अयोध्या नगरी,नंदा नगर को शिकायत के आधार पर लसुडिया पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। देवेंद्र मराठा के ख़िलाफ़ ढाबा, होटल, कालोनाइज़र, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ज़िम संचालकों ने सांध्य दैनिक अख़बार में खबर छापने के नाम पर जबरिया वसूली की शिकायत दर्ज करवाई थी। देवेंद्र मराठा ने कई खबरों के आधार पर लोगों को ब्लैकमेल भी किया गया।

कलेक्टर मनीष सिंह ने इस कार्रवाई के साथ पत्रकारिता की आड़ में पनप रहे संगठित अपराध पर नियंत्रण करने के लिए जिलेवासियों का आवाह्न करते हुए कहा है की यदि कोई भी व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में वसूली का प्रयास करता है तो वे उसे बिना किसी भय के पुलिस के सुपूर्द करें। कलेक्टर श्री मनीष सिंह ने शासकीय विभाग के सभी अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि फर्जी पत्रकारों से दूरी बनाकर रखें।

गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021

भारतीय प्रेस परिषद : एक संक्षिप्त विवरण ।

 

भारतीय प्रेस परिषद : एक संक्षिप्त विवरण ।



भारतीय प्रेस परिषद : एक संक्षिप्त विवरण ।


भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India ; PCI) एक संविघिक स्वायत्तशासी संगठन है जो प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने व उसे बनाए रखने, जन अभिरूचि का उच्च मानक सुनिश्चित करने से और नागरिकों के अघिकारों व दायित्वों के प्रति उचित भावना उत्पन्न करने का दायित्व निबाहता है। सर्वप्रथम इसकी स्थापना ४ जुलाई सन् १९६६ को हुई थी।


अध्यक्ष परिषद का प्रमुख होता है जिसे राज्यसभा के सभापति, लोकसभा अघ्यक्ष और प्रेस परिषद के सदस्यों में चुना गया एक व्यक्ति मिलकर नामजद करते हैं। परिषद के अघिकांश सदस्य पत्रकार बिरादरी से होते हैं लेकिन इनमें से तीन सदस्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बार कांउसिल आफ इंडिया और साहित्य अकादमी से जुड़े होते हैं तथा पांच सदस्य राज्यसभा व लोकसभा से नामजद किए जाते हैं - राज्य सभा से दो और लोकसभा से तीन।


प्रेस परिषद, प्रेस से प्राप्त या प्रेस के विरूद्ध प्राप्त शिकायतों पर विचार करती है। परिषद को सरकार सहित किसी समाचारपत्र, समाचार एजेंसी, सम्पादक या पत्रकार को चेतावनी दे सकती है या भर्त्सना कर सकती है या निंदा कर सकती है या किसी सम्पादक या पत्रकार के आचरण को गलत ठहरा सकती है। परिषद के निर्णय को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।


काफी मात्रा में सरकार से घन प्राप्त करने के बावजूद इस परिषद को काम करने की पूरी स्वतंत्रता है तथा इसके संविघिक दायित्वों के निर्वहन पर सरकार का किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं है।


इतिहास 

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सन् १९५४ में प्रथम प्रेस आयोग ने प्रेस परिषद् की स्थापना की अनुशंशा की।

पहली बार ४ जुलाई सन् १९६६ को स्थापित

सन् ०१ जनवरी १९७६ को आन्तरिक आपातकाल के समय भंग

सन् १९७८ में नया प्रेस परिषद अधिनियम लागू

सन् १९७९ में नए सिरे से स्थापित

प्रेस परिषद् अधिनियम, १९७८ संपादित करें


प्रेस परिषद् की शक्तियाँ निम्नानुसार अधिनियम की धारा 14 और 15 में दी गई हैं।


परिषद् की निधि

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अधिनियम में दिया गया है कि परि­षद, अधिनियम में अंतर्गत अपने कार्य करने के उद्देश्य से, पंजीकृत समाचारत्रों और समाचार एजेंसियों से निर्दि­ट दरों पर उद्ग्रहण शुल्क ले सकती है। इसके अतिरिक्त, केन्द्रीय सरकार, द्वारा परिषद् को अपने कार्य करने के लिये, इसे धन, जैसाकि केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे, देने का व्यादेश दिया गया है।


परिषद् की शक्तियाँ

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परिनिंदा करने की शक्ति

14.1 जहाँ परिषद् को, उससे किए गए परिवाद के प्राप्त होने पर या अन्यथा, यह विश्वास करने का कारण हो कि किसी समाचारपत्र या सामाचार एजेंसी ने पत्रकारिक सदाचार या लोक-रूचि के स्तर का अतिवर्तन किया है या किसी सम्पादक या श्रमजीवी पत्रकार ने कोई वृत्तिक अवचार किया है, वहां परिषद् सम्बद्ध समाचारत्र या समाचार एजेंसी, सम्पादक या पत्रकार को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात उस रीति से जाँच कर सकेगी जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गये विनियमों द्वारा उपबन्धित हो और यदि उसका समाधान हो जाता है कि ऐसा करना आवश्यक है तो वह ऐसे कारणों से जो लेखवद्ध किये जायेंगे, यथास्थिति उस समाचारपत्र, समाचार एजेंसी, सम्पादक या पत्रकार को चेतावनी दे सकेगी, उसकी भर्त्सना कर सकेगी या उसकी परिनिंदा कर सकेगी या उस संपादक या पत्रकार के आचरण का अनुमोदन कर सकेगी, परंतु यदि अध्यक्ष की राम में जाँच करने के लिए कोई पर्याप्त आधार नहीं है तो परिषद् किसी परिवाद का संज्ञान नहीं कर सकेगी।


14.2 यदि परिषद् की यह राय है कि लोकहित् में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह किसी समाचारपत्र से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह समाचारपत्र या समाचार एजेंसी, संपादक या उसमें कार्य करने वाले पत्रकार के विरूद्ध इस धारा के अधीन किसी जाँच से संबंधित किन्हीं विशि­टयों को, जिनके अंतर्गत उस समाचारपत्र, समाचार एजेंसी, सम्पादक या पत्रकार का नाम भी है उसमें ऐसी नीति से जैसा परिषद् ठीक समझे प्रकाशित करे।


14.3 उपधारा 1, की किसी भी बात से यह नहीं समझा जायेगा कि वह परिषद् को किसी ऐसे मामले में जाँच करने की शक्ति प्रदान करती है जिसके बारे में कोई कार्रवाई किसी न्यायालय में लम्बित हो।


14.4 यथास्थिति उपधारा 1, या उपधारा 2, के अधीन परिषद् का विनिश्चय अंतिम होगा और उसे किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जायेगा।


परिषद् की साधारण शक्तियाँ

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14.5 इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन या कोई जाँच करने के प्रयोजन के लिए परिषद् को निम्नलिखित बातों के बारे में संपूर्ण भारत में वे ही शक्तियाँ होंगी जो वाद का विचारण करते समय


1908 का 5, सिविल न्यायालय में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन निहित हैं, अर्थात-


क, व्यक्तियों को समन करना और हाजिर कराना तथा उनकी शपथ पर परीक्षा करना,


ख, दस्तावेजों का प्रकटीकरण और उनका निरीक्षण,


ग, साक्ष्य का शपथ कर लिया जाना,


घ, किसी न्यायालय का कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतिलिपियों की अध्यपेक्षा करना,


ड़, साक्षियों का दस्तावेज़ की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना,


च, कोई अन्य विषय जो विहित जाए।


2, उपधारा 1, की कोई बात किसी समाचारपत्र, समाचार एजेंसी, संपादक या पत्रकार को उस समाचारपत्र द्वारा प्रकाशित या उस समाचार एजेंसी, संपादक या पत्रकार द्वारा प्राप्त रिपोर्ट किये गये किसी समाचार या सूचना का स्रोत प्रकट करने के लिए विवश करने वाली नहीं समझी जायेगी।


1860 का 45, 3, परिषद् द्वारा की गयी प्रत्येक जाँच भारतीय दंड संहिता की धारा 193 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझी जायेगी।


4, यदि परिषद् अपने उद्देश्यों को क्रियान्वित करने के प्रयोजन के लिए या अधिानियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए आवश्यक समझती है तो वह अपने किसी विनिश्चय में या रिपोर्ट में किसी प्राधिकरण के, जिसके अन्तर्गत सरकार भी है, आचरण के संबंध में ऐसा मत प्रकट कर सकेगी जो वह ठीक समझे। शिक्षाविदों की विशि­ट मंडली द्वारा संवारा गया है। उच्चतम न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश न्यायामूर्ति श्री जे. आर. मधोलकर, पहले अध्यक्ष थे जिन्होंने 16 नवम्बर 1966 से 1 मार्च 1968 तक परिषद् की अध्यक्षता की। इसके पश्चात न्यायामूर्ति श्री एन. राजगोपाला अय्यनगर 4 मई 1968 से 1 जनवरी 1976 तक, न्यायामूर्ति श्री एन. एन. ग्रोवर 3 अप्रैल 1979 से 9 अक्टूबर 1985 तक, न्यायामूर्ति श्री एन. एन. सेन 10 अक्टूबर 1985 से 18 जनवरी 1989 तक और न्यायामूर्ति श्री आर. एस. सरकारिया 19 जनवरी 1989 से 24 जुलाई 1995 तक और श्री पी. बी. सार्वेत 24 जुलाई 1995 से अब तक परिषद् के अध्यक्ष रहे हैं। ये उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश थे। इन सभी ने परिषद् के दर्शन और कार्यों में गहन वचनवद्धता के साथ, परिषद् का मार्गदर्शन किया। परिषद् इनसे निर्देश पाकर, इनके ज्ञान और बुद्धि से अत्यधिक लाभान्वित हुई।


परिषद् की कार्यप्रणाली

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परिषद् मूलतः अपनी जाँच समितियों के माध्यम से अपना कार्य करती है, तथा पत्रकारिता नियमों के उल्लंघन के लिए प्रेस के विरूद्ध अथवा प्राधिकारियों द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के लिए ब्रेक्स से प्राप्त शिकायतों पर निर्णय देती है। परिषद् में शिकायत दर्ज करने की नियत प्रक्रिया है। एक शिकायतकर्ता के लिये अनिवार्य है कि वह प्रतिवादी समाचारपत्र के संपादक को लिखकर उनका ध्यान प्रथमतः पत्रकारिता नीति के उल्लघंन अथवा लोकरूचि के विरूद्ध अपराध की ओर आकृ­ट करे। शिकायत किये गये मामले की परिषद् को कतरन भेजने के अतिरिक्त शिकायतकर्ता के लिये यह घो­ाणा करना आवश्यक है कि उन्होंने अपनी संपूर्ण जानकारी तथा विश्वास के अनुसार परिषद् के समक्ष संपूर्ण तथ्य प्रस्तुत कर दिये हैं तथा शिकायत में कथित किसी वि­ाय में किसी न्यायालय में कोई मामला लंबित नहीं है और वह कि यदि परिषद् के सम्मुख जाँच लंबित होने के दौरान शिकायत में कथित कोई मामला न्यायालय की किसी कार्यवाही का वि­ाय बन जाता है तो वे तत्काल इसकी सूचना परिषद् को देंगे। इस घो­ाणा का कारण यह है कि अधिनियम की धारा 14, 3, को देखते हुए, परिषद् ऐसे किसी मामले में कार्यवाही नहीं कर सकती जोकि न्यायाधीन हो।


यदि अध्यक्ष महोदय को ऐसा लगता है कि जाँच के पर्याप्त आधार नहीं है, तो शिकायत खारिज कर, परिषद् को इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं, अन्यथा समाचारपत्र के संपादक अथवा सम्बद्ध पत्रकार से कारण बताने के लिए कहा जाता है कि उनके विरूद्ध कार्यवाही न की जाये। संपादक अथवा पत्रकार से लिखित वक्तव्य तथा अन्य सम्बद्ध सामग्री प्राप्त होने पर, परिषद् का सचिवालय, जाँच समिति के सम्मुख मामला रखता है। जाँच समिति विस्तार से शिकायत की जाँच और परीक्षण करती है। यदि आवशक हो, तो यह दोनों पक्षों से अन्य विवरण अथवा दस्तावेजों की माँग करती है। पार्टियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने अथवा कानूनी पेशेवर सहित अपने प्राधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से जाँच समिति के सम्मुख साक्ष्य देने का अवसर दिया जाता है। उपलब्ध तथ्यों और जाँच समिति के सम्मुख दये गये शपथपत्रों अथवा मौखिक साक्ष्य के आधार पर समिति अपनी उपलब्धियाँ और सिफारिशें तैयार करती है और परिषद् के सम्मुख रखती है जोकि उन्हें स्वीकार अथवा अस्वीकार कर सकती है। जहाँ परिषद् संतु­ट होती है कि एक समाचार पत्र अथवा समाचार एजेंसी ने पत्रकरिता नीति के स्तरों अथवा जनरूचि का उल्लंघन किया है अथवा एक संपादक अथवा श्रमजीवी पत्रकार ने व्यावसायिक कदाचार किया है, तो परिषद् जैसी स्थिति हो, समाचापत्र, समाचार एजेंसी, संपादक अथवा पत्रकार की परिनिन्दा, भर्त्सना कर सकती है अथवा उन्हें चेतावनी दे सकती है अथवा उनके आचरण का अनुमोदन कर सकती है। प्राधिकारियों के विरूद्ध प्रेस द्वारा दर्ज शिकायतों में, परिषद् को सरकार सहित किसी प्राधिकारी के आचरण के सबंध में ऐसी टिप्पणियां, जैसी वह उचित समझे, करने का अधिकार है। परिषद् के निर्णय अंतिम होते है और किसी विधि न्यायालय में उनपर आपत्ति नहीं की जा सकती। अतः इस प्रकार परिषद् को अत्यधिक नैतिक प्राधिकार है। यद्यपि इसके पास कानूनी रूप से देने के लिये दंडात्मक अधिकार नहीं है।


परिषद् द्वारा तैयार किये गये जाँच विनियम, अध्यक्ष महोदय को प्रेस परिषद् अधिनियम की परिधि में आने वाले किसी मामले के सबंध में मूल कार्यवाही करने अथवा किसी पार्टी को नोटिस जारी करने का अधिकार देते है। सामान्य जाँच के लिये शिकायतकर्ता द्वारा परिषद् के सम्मुख एक शिकायत दर्ज करनी होती है, इसके अलावा मूल कार्यवाही के लिए काफी हद तक वही प्रक्रिया होती है जैसाकि सामान्य जाँच में होती है। अपने कार्य करने के लिये अथवा अधिनियम के अंतर्गत जाँच करने के लिये, परिषद् निम्नलिखित मामलों के सबंध में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत एक मुकदमें की छानबीन के लिये सिविल न्यायालय में निहित कुछ अधिकारों का इस्तेमाल करती है


(क) लोगों को सम्मन करने और उपस्थिति हेतु दबाव डालने तथा शपथ देकर उनका परीक्षण करने हेतु।


(ख) दस्तावेजों की खोज और निरीक्षण की आवश्यकता हेतु।


(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य की प्राप्ति हेतु।


(घ) किसी न्यायालय अथवा कार्यालय से किसी सरकारी रिकार्ड अथवा इसकी प्रतियों की मांग हेतु।


(ड.) गवाहों अथवा दस्तावेजों के परीक्षण हेतु कमीशन जारी करना और


(च) कोई अन्य मामला, जैसकि निर्दि­ट किया जाये।


परिषद् अपना कार्य करने के लिये पार्टियों से सहयोग की आशा करती है। कम से कम दो मामलों में, जहाँ परिषद् ने गौर किया कि पार्टियाँ (पक्ष) एकदम असहयोगी अथवा कठोर थीं, वहाँ परिषद् ने अत्याधिक संयम एवं अनिच्छा से, अपने समक्ष उपस्थित होने और अथवा रिकार्ड आदि देने हेतु उन्हें विवश करने के अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत अपने प्राधिकार का इस्तेमाल किया। चण्डीगढ. के कुछ पत्रकारों की मुख्यमंत्री और हरियाणा सरकार के विरूद्ध शिकायत में, परिषद् द्वारा भेजे गये नोटिस का जवाब देने में प्राधिकारियों द्वारा अस रहने पर, उन्हें प्राधिकारियों को परिषद् के बल प्रयोग संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल के बारे में, पहले परिषद् को चेतावनी देनी पडी.। इसी प्रकार बी. जी. वर्गीय के दी हिन्दुस्तान टाइम्स के विरूद्ध प्रसिद्ध मामलें में, बिरलाज को श्री वर्गीय और श्री के. के. बिरला के बीच हुआ पूर्ण पत्राचार प्रदान करने का निर्देश दिया गया।


एक समाचारपत्र, जिसे परिषद् द्वारा तीन बार परिनिंदित किया गया था, के मामले में कुछ अवधि हेतु डाक की रियायती दरों अथवा अखबारी कागज के वितरण, विज्ञापनों, मान्यता के रूप में कुछ सुविधाएं और रियायतें न देने पर सम्बद्ध प्राधिकारियों से सिफारिश करने का परिषद् को अधिकार दिये जाने के लिए, परिषद् ने 1980 में अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया था।


प्राधिकारियों की ओर से परिषद् की सिफारिसों के स्वीकृति की अनिवार्य होने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त परिषद् का विचार था कि, समाचारपत्रों के मामलों के समान प्रेस परिषद् अधिनियम 1978 की धारा 15 (4) के अंतर्गत, सरकार सहित किसी प्राधिकरण के आचरण का सम्मान करते हुए अपने किन्हीं निर्णयों अथवा रिपोर्टो में, ऐसी टिप्पणियां, जैसी वह उचित समझे, करने के परिषद् के अधिकार में ऐसे प्राधिकारियों को चेतावनी देने, उनकी भर्त्सना करने अथवा उन्हें परिनिंदित करने के अधिकार भी शामिल होना चाहिए और यह कि, इस संबंध में परिषद् की टिप्पण्यों को संसद के दोनों सदनों और अथवा सम्बद्ध राज्य के विधान के सम्मुख रखा जाना चाहिए। वर्­ष 1987 में, परिषद् ने मामले पर पुनर्विचार किया और विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात दंडात्मक अधिकार हेतु प्रस्ताव को वापिस लेने का निर्णय किया क्योंकि इस संबंध में पुनर्विचार किया गया कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिये प्राधिकारियों द्वारा इन अधिकारों का दुरूपयोग किया जा सकता था।


तभी से, बार-बार, सुझाव सन्दर्भ परिषद् को दिये गये हैं कि चूककर्ता समाचारपत्रों/पत्रकारों को दंड देने के लिए परिषद् के पास दंडात्मक अधिकार होने चाहिए। इसके जवाब में परिषद् ने लगातार यही विचार किया है कि अधिनियम की विद्यमान योजना के अंतर्गत इसे दिये गये नैतिक अधिकार पर्याप्त हैं। अक्टूबर 1992 में नई दिल्ली में प्रेस परि­ादों के अंतर्रा­ट्रीय सम्मेलन में अपने उद्घाटन भा­षण में सूचना और प्रसारण केन्द्रीय मंत्री द्वारा यह सुझाव दोहराया गया, परंतु परिषद् नें निम्निलिखित कारणों से इसे सर्व सम्मति से अस्वीकार कर दिया -


यदि परिषद् को दंड देने/जुर्माना लगाने का अधिकार दे दिया जाता तो यह दंड देने के अधिकार के समान होता जोकि केवल तभी लागू होता है जब प्रेस द्वारा सरकार तथा इसके प्राधिकारियों के विरूद्ध शिकायतें की जाती हैं। सार्थक दंड देने का अधिकार कई मामलों को उठाता है जिनमें क, प्रमाण का दायित्व, ख, प्रमाण का स्तर, ग, कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार और लागत और घ, समीक्षा और अथवा अपील उपलब्ध होगी अथवा नहीं, शामिल हैं। इन मामलों में से सभी अथवा किसी एक का प्रभाव मूल आधार के विरोध में हो सकता है कि प्रेस परि­ादें शिकायतों की सुनवाई के लिये लोकतांत्रिक, प्रभावी और सस्ती सुविधा प्रदान करती हैं और यह कि परिणामी अनिवार्यता यह होगी कि इसके परिणामस्वरूप प्रेस परि­ादें औपचारिकता, लागत और पहुँच की जानी-मानी समस्याओं और न्यायिक अधिकार का प्रयोग करने वाले न्यायालय बन जायेंगी और समान रूप से विलंब होगा जिससे प्रेस परिषद् का मूल उद्देश्य विफल हो जायेगा।


दिसंबर 1992 में, परिषद् को केन्द्रीय सरकार से एक पत्र प्राप्त हुआ जिसमें इस वि­ाय पर परिषद् के विचार माँगे गये कि क्या यह सुनिश्चत करने के लिए कि, सांप्रदायिक लेखों के संबंध में मार्गनिर्देशों के उल्लंघन हेतु प्रेस परिषद् द्वारा परिनिंदित समाचारपत्रों/पत्रिकाओं को सरकार से मिलने वाले प्रोत्साहन जैसे विज्ञापन आदि से वंचित रखा जा सकता है, कोई प्रक्रिया निर्दि­ट की जा सकती है और क्या प्रेस परिषद् यह सुझाव देने की स्थिति में होगी कि जब यह एक समाचारपत्र/पत्रिका को मार्गनिर्देशों के उल्लंघन का दो­षी ठहराती है तब क्या कार्यवाही की जानी चाहिए। परिषद् ने जून 93 की अपनी बैठक में, परिषद् को दंडात्मक अधिकार दिये जाने के विरूद्ध विगत समय में इसके द्वारा लिये गये स्टैंड के प्रकाश में मामले पर विचार किया। मामले पर गहराई से विचार करने पर, परिषद् ने अनुभव किया कि इस समय परिषद् द्वारा जिस नैतिक अधिकार का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह काफी प्रभावी है और प्रेस को आत्म नियमन का मार्ग दिखाने में दंडात्मक अधिकारों की आवश्यकता नहीं है। हालांकि परिषद् ने निर्णय किया कि यदि एक समाचारपत्र तीन वर्­षों में किसी प्रकार के अनैतिक लेखन के लिये दो बार परिनिंदित किया जाता है, तब ऐसे निर्णयों की प्रतियाँ भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिव और सम्बद्ध राज्य सरकार के मुख्य सचिव, को सूचनार्थ और ऐसी कार्यवाही, जैसाकि वे अपने विवेक और मामले की परिस्थितियों में उचित समझे, हेतु भेजी जानी चाहिए। परिषद् ने निर्णय किया कि तीन वर्­षों की अवधि को दूसरी बार परिनिंदा की तारीख से उल्टे गिनते हुए पूर्ववर्ती तीन वर्­षों के रूप में लिया जायेगा।


आचार संहिता संपादित

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प्रेस परिषद् अधिनियम, 1978 की धारा 13 2 ख्र द्वारा परिषद् को समाचार कर्मियों की संहायता तथा मार्गदर्शन हेतु उच्च व्ययवसायिक स्तरों के अनुरूप समाचारपत्रों; समाचारं एजेंसियों और पत्रकारों के लिये आचार संहिता बनाने का व्यादेश दिया गया है। ऐसी संहिता बनाना एक सक्रिय कार्य है जिसे समय और घटनाओं के साथ कदम से कदम मिलाना होगा।


निमार्ण संकेत करता है कि प्रेस परिषद् द्वारा मामलों के आधार पर अपने निर्णयों के जरिये संहिता तैयार की जाये। परिषद् द्वारा जनरूचि और पत्रकारिता नीति के उल्लंघन शीर्­ाक के अंतर्गत भारतीय विधि संस्थान के साथ मिलकर पहले वर्­ा 1984 में अपने निर्णयों / मार्गनिर्देशों के जरिये व्यापक सिद्धातों का संग्रह तैयार किया गया था। सिद्धांतों का यह संकलन परिषद् के निर्णयों अथवा अधिनिर्णयों अथवा इसके अथवा इसके द्वारा अथवा इसके अध्यक्ष द्वारा जारी मार्गनिर्देशों से चुना गया है। वर्­ा 1986 में, सरकार और इसके प्राधिकारियों के विरूद्ध शिकायतों अथवा मामलों, जोकि दूरगाती और महत्वपूर्ण प्रकृति के थे और जिसमें सरकार सहित किसी प्राधिकारी के आचरण का सम्मान करते हुए टिप्पणियाँ शामिल थीं, में निर्णयों और सिद्धांतों से सम्बद्ध प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन शीर्­षक के अंतर्गत संकलन का दूसरा भाग प्रकाशित किया गया।


वर्­ष 1986 से संहिता निर्माण की त्वरित प्रकिया सहित शिकायतों की संस्थापना और प्रेस परिषद् द्वारा उनके निपटान में लगातार वृद्धि होती रही है। 1992 में परिषद् ने पत्रकारिता नीति निर्देशिका प्रस्तुत की जिसमें परिषद् द्वारा जारी मार्गनिर्देशों और निर्णयों से छाँटकर लिये गये पत्रकारिता नीति सिद्धांत हैं। चूँकि तब से परिषद् द्वारा प्रेस के अधिकारों और दायित्वों से सम्बद्ध कई अत्यधिक महत्वपूर्ण निर्णय दिये गये हैं, मार्गनिर्देशिका का 162 पृ­ठों का विस्तृत और व्यापक दूसरा संस्करण जारी किया जा चुका है। इसमें निजता के अधिकार की संकल्पना भी दी गई है और इस संबंध में तथा मागदिर्शन हेतु उच्च व्यावसायिक स्तरो के अनुरूप समाचार पत्रोंकिये जाने वाले मार्गनिर्देश भी विनिर्दि­ट किये गये है। प्रेस, सार्वजनिक कर्मचारियों और लोकप्रिय व्यक्तियों के मार्गदर्शन हेतु इसके कुछ पहलुओं में मानहानि कानून का भी सहयोग लिया गया है। परिषद् ने नगरपालिका समिति के सार्वजनिक पदाधिकारियों की कथित मानहानि के संबंध में महत्वपूर्ण अधिनिर्णय दिया कि प्रेस अथवा मीडिया के विरूद्ध नुकसान हेतु कार्यवाही का उपचार, सरकारी पदाधिकारियों को उनकी सरकारी ड्यूटी के निर्वाह से सम्बद्ध उनके कार्यों और आचरण के संबंध में साधारणतया उपलब्ध नहीं है, चाहे प्रकाशन ऐसे तथ्यों और वक्तव्यों पर आधारित हो जोकि सत्य न हो, जब तक कि पदाधिकारी यह स्थापित न करे कि प्रकाशन, सत्य का आदर और परवाह न करते हुए, किया गया था। ऐसे मामले में बचाव पक्ष् मीडिया अथवा प्रेस का सदस्य के लिये यह सिद्ध करना पर्याप्त होगा कि उन्होंने तथ्यों के समुचित सम्यापन के पश्चात कार्य किया, उनके लिये यह सिद्ध करना आवश्यक नहीं है कि उन्होंने जो कुछ लिखा है, वह सत्य है। परंतु जहाँ यह सिद्ध होता है कि प्रकाशन दुर्भावना अथवा व्यक्त वैर से प्रवृत्त और झूठा है, वहाँ बचाव पक्ष के लिये कोई बचाव नहीं होगा और नुकसान हेतु उत्तरदायी होगा। हालाँकि एक सार्वजनिक पदाधिकारी कोउन मामलों में जोकि उनकी ड्यूटी के निर्वाह से सम्बंद्ध न हों, वही सुरक्षा मिलती है जैसाकि किसी अन्य नागरिक को मिलती है। हालाँकि न्यायापालिका, संसद और राज्य विधानमंडल इस नियम का अपवाद हैं क्योंकि पूर्ववर्ती इसकी अवमानमा हेतु दंड के अधिकार से सुरक्षित है और उत्तरवर्ती संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के अंतर्गत विशे­ााधिकारों से सुरक्षित है। परिषद् ने आगे दिया है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 अथवा कोई समान अधिनियमन अथवा उपबंध जिसे कानूनी शक्ति प्राप्त हो, प्रेस अथवा मीडिया पर नियंत्रण नहीं रख सकते। यह भी दिया गया है कि ऐसा कोई कानून नहीं है जोकि प्रेस/मीडिया पर पूर्व नियंत्रण रखने अथवा वर्जित रखने का राज्य अथवा इसके अधिकारियों को अधिकार देता हो।


सार्वजनिक पदाधिकारी के निजता के दावे के संबंध में, परिषद् ने निर्दि­ट किया है कि यदि सार्वजनिक पदाधिकारी की निजता और उनके निजी आचरण, आदतों व्यक्तिगत कार्यों और चरित्र की विशेषताओं, जिनका टकराव अथवा संबंध उनकी शासकीय ड्यूटी के समुचित निर्वाह से हो, के बारे में जानने के जानता के अधिकार के मध्य टकराव हो, तो पूर्ववर्ती को उत्तरवर्ती के सामने झुकना चाहिए। हालाँकि, व्यक्तिगत निजता के मामलों में, जोकि उनकी शासकीय ड्यटी के निर्वाह से सम्बद्ध नहीं है, सार्वजनिक पदाधिकारी को वही सुरक्षा मिलती है जोकि किसी अन्य नागरिक को मिलती है।


यह मार्गनिर्देशिका कुल मिलाकर विधि संबंधी, नैतिक और सदाचार संबंधी समस्याओं जोकि प्रतिदिन समाचारपत्रों के मालिकों, पत्रकारों संपादकों का विरोध करती है, के माध्यम से सुरक्षा और जिम्मेवारी का मार्ग सुझाती है। मार्गनिर्देशिका अकाट्य सिद्धांतों का संकलन नहीं है बल्कि इसमें व्यापक सामान्य सिद्धांत हैं, जोकि प्रत्येक मामले की परिस्थिति को देखते हुए समुचित विवेक और अनुकूलन के साथ लागू किये जाते है, तो वे व्यावसायिक ईमानदारी के मार्ग सहित पत्रकारों को उनके व्यवसाय के संचालन को आत्म-संयमित करने में उनकी सहायता करेंगे। किसी भी तरह ये थकाउ नहीं है न ही इनका अभिप्राय सख्ती है जोकि प्रेस के स्वच्छंद कार्य में बाधा डालती हो।

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गुरुवार, 30 सितंबर 2021

ठगों ने IFWJ पत्रकार संगठन हड़पने के लिए फिर की साजिश, जालसाज ठगों पर कई अपराधिक प्रकरण दर्ज, एक 420 के प्रकरण में फरार

  

ठगों ने IFWJ पत्रकार संगठन हड़पने के लिए फिर की साजिश, जालसाज ठगों पर कई अपराधिक प्रकरण दर्ज, एक 420 के प्रकरण में फरार

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लो पत्रकार साथियों जिसका डर था वही हो गया फिर फिर पत्रकारिता के नाम पर कलंक ने अपनी आदत अनुसार एक पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे में फिर सेंध लगाने की साजिश कर दी, जिनको संगठन ने मान सम्मान और खाने को दिया उसी की थाली में छेद करके जिनकी औकात नहीं उन्होंने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव को ही फर्जी मीटिंग बुलाकर हटा दिया, पहले भी इन जालसाजों ने जिस जिस संगठन में रहे सभी का सत्यानाश कर चुके हैं, अब यह खबर आ रही है दिल्ली से आईएफडब्ल्यूजे के कार्यालय से संगठन के राष्ट्रीय महासचिव श्री परमानंद पांडे के द्वारा पत्र जारी कर यह जानकारी देश में फैले संगठन के समस्त सदस्य और पदाधिकारियों को अवगत करा रहे हैं। आखिर इनका साजिशकर्ता नटवरलाल कहां-कहां अपनी औकात दिखाएगा, आज उसकी औकात आईएफडब्ल्यूजे के संगठन दिखा दी । आप सभी को संबंधित जानकारी से अवगत होकर ऐसे लोगों से सावधान हो जाना चाहिए।

श्री परमानंद पांडेय सचिव जनरल : आईएफडब्ल्यूजे IFWJ द्वारा जारी नोटिस एवं जानकारी

प्रिय मित्रों, 
हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि चार या पांच निराश जोकर, जो दूर-दूर तक मीडियाकर्मियों की समस्याओं से संबंधित नहीं रहे हैं और न ही कभी मीडिया कर्मचारियों के संघर्ष में भाग लिया है, नोएडा के एक क्लब में इकट्ठे हुए और आईएफडब्ल्यूजे को नुकसान पहुंचाने और बदनाम करने का फैसला किया। लेकिन वे बुरी तरह विफल रहे क्योंकि किसी ने उन्हें कोई महत्व नहीं दिया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इन जोकरों का महान संगठन-आईएफडब्ल्यूजे- से कोई संबंध नहीं है, जिसका गौरवशाली इतिहास और पत्रकारों के लिए संघर्ष की गाथा है। ये कॉमेडियन विज्ञापनों को बटोरने, चापलूसी करने और अधिकारियों को चकमा देने के लिए जाने जाते हैं, छोटे-छोटे प्रॉपर्टी डीलर के रूप में काम करते हैं, लेकिन IFWJ के नाम को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। क्लब की बैठक में एक सज्जन थे, जो कई आपराधिक मामलों में जेल गए थे, एक अन्य व्यक्ति जिसका सांप्रदायिकता के साथ अस्पष्ट संबंध है, एक सज्जन जिस पर पटियाला हाउस कोर्ट में दीवानी मुकदमा वापस लेने के लिए नकद और तरह की रिश्वत लेने का आरोप है। बैठक में पीएफआई का एक एजेंट भी मौजूद था। एक बार फिर, एक व्यक्ति था, जो अखबार के मालिकों का एजेंट था/है। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि जब इन भैंसों को अपना नाम देने के लिए कोई व्यक्ति नहीं मिला, तो उन्होंने के एम झा जैसे एक बहुत ही सस्ते व्यक्ति को अपना अध्यक्ष पाया, जो कुछ दिन पहले किसी अन्य संगठन में शामिल होने के लिए IFWJ छोड़ दिया था। वह बैठक में भी मौजूद नहीं थे। कोई नहीं जानता कि दूसरे संगठन के संबंध में श्री झा का क्या रुख होगा? उन्होंने श्री मनोज मिश्रा पर महासचिव का पद थोपने का प्रयास किया, जिन्होंने अनुकरणीय तत्परता से और अपनी नियुक्ति के एक घंटे के भीतर खुद को अलग कर लिया। यह उनके व्यक्तित्व में बुनियादी ईमानदारी को दर्शाता है कि सोशल मीडिया पर इस खबर के फैलने के एक घंटे में उन्होंने सभी समूहों में प्रसारित एक और पोस्ट लिखा कि उनका असंतुष्टों के झांसे से कोई लेना-देना नहीं है। साथियों, ये बैंडिकूट राज्य इकाइयों को अपने कुकर्मों के बारे में फोन करते रहे हैं, लेकिन उन्हें सभी राज्य इकाइयों से फटकार मिल रही है। इन जॉनीज़ ने IFWJ नेतृत्व के खिलाफ वित्तीय आरोप लगाकर अपना मतलब दिखाया, यह अच्छी तरह से जानते हुए कि पिछले छह वर्षों से संगठन कुछ पदाधिकारियों के व्यक्तिगत योगदान पर चल रहा है। भीषण संकट में भी उनमें से एक ने हेमंत तिवारी द्वारा दान किया गया फर्नीचर और कंप्यूटर अपने घर ले लिया था और उन्हें कभी वापस नहीं किया। दुर्भाग्य से, वह IFWJ के कोषाध्यक्ष थे, लेकिन उन्होंने अपनी आत्मा को पुराने धोखेबाज को बेच दिया, जो पूरे पत्रकार समुदाय से घृणा और तिरस्कार करता है। अब साफ है कि ये लोग उसी मास्टर ठग के हाथों में खेल रहे हैं। एकजुट रहो।बहुत जल्द हम उनके गंदे खेल का पर्दाफाश करेंगे। आपको धन्यवाद, सादर, 
परमानंद पांडेय 
सचिव जनरल: आईएफडब्ल्यूजे IFWJ

शनिवार, 25 सितंबर 2021

ब्लैकमेलर फ़र्जी पत्रकार अवधेश भार्गव की काली करतूतें, लड़की के साथ बलात्कार करने... पर पड़ी न्यायालय से सजा, फिर एक मुकदमा दर्ज

   

 ब्लैकमेलर फ़र्जी पत्रकार अवधेश भार्गव ( फर्जी आइसना ) की काली करतूतें, 


भोपाल / विनय जी. डेविड ( वरिष्ठ पत्रकार )

9893221036

भोपाल । हरामखोर ब्लैकमेलर फ़र्जी पत्रकार अवधेश भार्गव ने बैरागढ़ की एक लड़की के साथ बलात्कार करने... के जुल्म में के आरोप में न्यायालय ने सजा सुनाई फिर भी यह हरामखोर मान नहीं रहा है, स्टेट बैंक का लुटेरा थाना शाहजहानाबाद में दर्ज 1975 में मुकदमे के आधार पर भोपाल सेंट्रल जेल में 3 साल की जेल काटी।

दूसरी लड़की के साथ बागसेवनिया थाना क्षेत्र में- 9ए/282 साकेत नगर भोपाल देवेन्द्र पाटीदार, पीयुष तिवारी, विवेक पाठक एवं थामस फ्रांसिस लड़की की इज्जत बचाते हुए बलात्कार करने की कोशिश पर हाथ पैर तोड़ कर डंडों से सर फाड़ कर नाले में फेंक दिया था विनय डेविड पत्रकार ने हमीदिया अस्पताल ले जाकर 56 टांके लगवा कर हड्डी में प्लास्टर बनवा कर जान बचाई। 


ब्लैकमेलर फ़र्जी पत्रकार अवधेश भार्गव ( फर्जी आइसना ) की काली करतूतें

अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में एक मूक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया उसकी भी रिपोर्ट घूम रही है, जबलपुर सर्किट हाउस में एक महिला के साथ रंगे हाथ पकड़ा या थाना सिविल लाइन जबलपुर ने की थी कार्रवाई। एक महिला के साथ छतरपुर खुजराहो में 3 स्टार होटल में अय्याशी करते पत्रकारों ने पकड़ा महिलाओं की इज्जत को देखते हुए उनका खबर में खुलासा नहीं कर रहा हूं । इसकी तथाकथित गर्लफ्रेंड जो बैरागढ़ की है उसने फोन पर जानकारी में बताया कि अवधेश भार्गव ने बहुत हारामी किस्म का व्यक्ति है जिसने कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर दी। कल से हम बहुत सारे खुलासे मय प्रमाण के करेगें। 

खबर के साथ पोस्ट फोटो को संभाल कर रख लीजिए सेव करके जरूरत पड़ने पर काम आएगी।

सभी लड़कियों के बयानों के साथ खबरों का मजा कल से लीजिए, अभी एक महिला को और अपनी गिरफ्त में ले रखा है उसकी भी जानकारी हम देंगे उसके साथ मिलकर झूठे मुकदमे दर्ज कराने की साजिश रच रहा है उसकी संपत्ति लूटने की साजिश में लगा। जैसे कि था ना कोई पहचान तगत ईदगाह हिल्स में नावेद हमीद के मकान को हड़प लिया था फर्जी एग्रीमेंट बनाकर उस पर कोर्ट से भी स्टे ले लिया था थाने में जूते पड़ने के बाद उस मकान को पैर पर गिरकर नावेद हमीद को वापस किया। इसी तरह इस महिला के की परिवार की संपत्ति हड़पने के चक्कर में लगा है। दिल्ली में पायल सिबिलामा किसकी गर्लफ्रेंड के ऊपर 30 से ज्यादा मुकदमे लगे हैं इसके साथ मिलकर इस ने 30 से ज्यादा धोखाधड़ी के अपराधों को अंजाम दिलवाया यह इसकी गर्लफ्रेंड तिहाड़ जेल में है भार्गव के साथ मिलकर यह महिला ने स्टेट न्यूज़ के कार्यालय में बैठकर कई लोगों को ज्वेलर्स ट्रैवल्स एजेंसी और मोबाइल वालों को करोड़ों रुपए का चूना लगाया। 

बैंक घोटाला, बीमा घोटाला, फर्जी वेबसाइट घोटाला, पत्रकार संगठन आइसना का फर्जी अकाउंट खोल करके 18 लाख रुपए विजया बैंक लालघाटी एवं भोपाल कोऑपरेटिव बैंक में 5 लाख का घोटाला किया, इस घोटाले में जनसंपर्क के भी कुछ अधिकारी गिरफ्त में आ गए हैं इस मामले की लोकायुक्त पुलिस भोपाल जांच कर रही है, पूर्व जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा जी को भी गुमराह करके उसने करोड़ों रुपए के फर्जी वेबसाइट में विज्ञापन जारी करवा लिए हाई कोर्ट जबलपुर ने केस की जांच करने के आदेश जारी किए हैं आर्थिक अपराध भोपाल ने धारा 420 467 468 471 का मुकदमा पंजीकृत कर लिया है जल्द..

जारी रहेगा सच खबरों का पैनी धारदार रिपोटिंग..?

नटवरलाल के काले कारनामों के सारे काले चिट्टे...

यह सभी खबर पुलिस थाने में दर्ज f.i.r. न्यायालय में दर्ज मुकदमे के बयान, न्यायालय के फैसले, महिलाओं के बयान और शिकायतों पर आधारित है 100 % पुष्ट खबर है।

यह खबर नहीं लिखना चाहता था कि मुझे लिखनी पड़ रही है क्योंकि जब कोई सठिया जाए तो उसको उसकी औकात दिखा देना चाहिए। सच सामने तो आता ही है

शनिवार, 18 सितंबर 2021

आइसना" जिला इकाई सागर में श्री मिलन सिंह यादव जिला संयोजक नियुक्त

  

 

आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन"*
( आइसना ) मध्य प्रदेश, sagar


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भोपाल. देश और मध्यप्रदेश में पत्रकारों का सबसे बड़ा लगातार 39 वर्षों से पत्रकारों की सेवा में समर्पित एवं लोकप्रिय संगठन *"आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन"* (आइसना ) की सागर जिला और तहसील स्तर में इकाइयों का गठन किया जाना है। संगठन के विस्तार हेतु *श्री मिलन सिंह यादव* जिला संयोजक* नियुक्त किया है.

आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन"*
( आइसना ) मध्य प्रदेश, sagar

यह पहला संगठन है जो मध्यप्रदेश में दशकों से पत्रकारों के लिए मध्यप्रदेश सरकार से पत्रकारों के हितों में सदैव संघर्ष और नेतृत्व करता रहा है आज भी पत्रकारों के हितों में कई प्रकरण माननीय हाईकोर्ट न्यायालय में विचाराधीन है।

आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन"*
( आइसना ) मध्य प्रदेश, sagar

आज बीना में हुई संगठन की बैठक में आइसना के मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष विनय जी. डेविड ने सागर जिला संयोजक पद पर श्री मिलन सिंह यादव को नियुक्त किया और शुभकामनाएं दी. इस बैठक में संगठन के संगठन महासचिव प्रशांत वैश्य, वरिष्ठ पत्रकार संतोष दुबे, जितेंद्र सिंह चौहान, नंदकिशोर चौधरी, माधव से पप्पू यादव, सतीश अहिरवार, राकेश यादव, परिषद से नवनीत कॉलिंस भी उपस्थित रहे.

आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन"*
( आइसना ) मध्य प्रदेश, sagar

सागर जिले के पत्रकार साथी आइसना की सदस्यता प्राप्त करने हेतू आमन्त्रित हैं। सदस्यता हेतू योग्यता प्रमाणपत्र, प्रेस द्वारा जारी परिचय पत्र, दो रंगीन फोटो, सहित संपर्क कर सदस्यता ले सकते है।

आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन"*
( आइसना ) मध्य प्रदेश, sagar

जिले एवं तहसील में सदस्यता प्राप्त करने हेतु पत्रकार साथी सम्पर्क कर सकते है। "आइसना" पत्रकार संगठन के सभी पदाधिकारी गणों एवं सदस्य गणों ने ढेर सारी शुभकामनाएं दी है आप भी शुभकामनाएं प्रेषित कर सकते हैं


*श्री मिलन सिंह यादव सागर जिला संयोजक*

+919826557778

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जारी : 18/09/2021

*मध्यप्रदेश में साथी संगठन से जुड़ने और अधिक जानकारी के लिए सुबह 11:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक संपर्क करें*

*विनय जी. डेविड*
प्रदेश अध्यक्ष
*"आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन"*
( आइसना ) मध्य प्रदेश
+91 9893221036

*विनोद मिश्रा*
प्रदेश महासचिव (आइसना)
+918770448757

*प्रशांत वैश्य*
प्रदेश संगठन महासचिव (आइसना)
+917999057770